Wednesday, 8 April 2020

जीरो कट वाले बाल कटवाकर थानेदार दे रहे हैं कोरोना से बचने के संदेश



मोदहापारा टीआई यदुमणि सिदार 
टिकरापारा टीआई याकूब मेमन 
रायपुर. लॉकडाउन के बीच शहर में जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुलिस वालों को दूसरे के साथ स्वयं को भी कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रखने की चिंता है। ड्यूटी के साथ लोगों को जागरूक करने भी पीछे नहीं हट रहे हैं। जागरूकता और स्वयं की सुरक्षा के लिए कुछ थानेदारों ने अपने सिर के बाल मुंडवा लिए हैं। जहां भी तैनात रहते हैं, लोगों को संदेश  देने से नहीं चूकते हैं कि दाढ़ी और बाल बड़े रखना भी कोरोना संक्रमण को बढ़ावा देता है। राजधानी के मौदहापारा थाने के टीआई यदुमणि सिदार, टिकरापारा थाने के टीआई याकूब मेमन और गोलबाजार टीआई बेर्नाड कुजूर ने अपने-अपने सिर के बाल जीरो कट करवा लिए हैं। इसके अलावा अपने परिवार और घर में काफी बदलाव किए हैं।
गोलबाजार टीआई बेर्नाड कुजूर
बाल कटवाकर घूम रहे
मौदहापारा टीआई सिदार, टिकरापारा टीआई मेमन और गोलबाजार टीआई कुजूर करीब सप्ताह भर पहले अपने सिर के बाल सामान्य रखते थे। बाद में जीरो कट करवा लिए, ताकि बाल ज्यादा से ज्यादा छोटा रहे। इस संबंध में टीआई सिदार का कहना है कि बाल छोटे रखने से वॉयरस का बाल में रहने की गुंजाइश काफी कम हो जाती है। टीआई मेमन का कहना है कि कोरोना वॉयरस कपड़ों के अलावा शरीर के बालों में भी रह जाता है। बड़े बाल में कोरोना वॉयरस कई दिन तक जीवित रह सकता है। गोलबाजार टीआई कुजूर का कहना है कि बालों में अधिक समय तक वॉयरस पड़ा रहता है, जो बाद में दूसरी चीजों में भी आ जाता है।
बरामदे में ही टांग रहे हैं वर्दी
पुलिस वालों के लिए वर्दी उनका मान-सम्मान होती है, लेकिन कोरोना संक्रमण ने इससे भी दूरी बना दी है। मौदहापारा टीआई सिदार ड्यूटी से घर जाने पर अपनी वर्दी बरामदे में ही रखते हैं। भीतर नहीं ले जाते हैं। वर्दी बाहर ही धुलती है। इसके बाद भीतर ले जाते हैं। इसके अलावा जूते-मौजे भी बाहर ही रख रहे हैं। और नहाने के बाद ही घर में प्रवेश करते हैं। सेनीटाइज होने के बाद ही घर में प्रवेशटिकरापारा टीआई याकूब मेमन और गोलबाजार टीआई बेर्नाड कुजूर भी ड्यूटी खत्म होने के बाद घर जाते हैं, तो पहले खुद को सेनेटाइज करते हैं। वर्दी और अन्य चीजों को बाहर ही रखते हैं। नहाने के बाद ही घर में प्रवेश कर रहे हैं। साथ ही बार-बार घर जाना कम कर दिए हैं। अब एक ही समय घर जा रहे हैं। इसी तरह आमानाका टीआई भरत लाल बरेठ भी सप्ताह में एक बार अपने घर जाते हैं। थाने में ही रहते हैं। घर वालों की याद आने पर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग कर लेते हैं।
आरक्षक से लेकर अफसर तक को खतरा
अस्पतालों में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर और नर्सों को वॉयरस से संक्रमित होने का जितना खतरा रहता है, उसी तरह का खतरा पुलिस वालों को भी रहता है। दिनभर कई स्थानों पर जाना, लोगों से बातचीत करना, भीड़भाड़ में जाना आदि काम के दौरान संक्रमण की चपेट में आने की आशंका पुलिस वालों को ज्यादा रहती है। इसलिए आरक्षक से लेकर पुलिस अफसरों को अलर्ट रहने कहा गया है।

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